1. आपकी गोशाला का नाम क्या है?
उत्तर: हमारी गोशाला का नाम नाडीपति गोशाला है।
2. आपकी गोशालाओं का पूरा पता क्या है?
उत्तर:
आंध्र प्रदेश
नाडीपति गोशाला
नाडीपति विलेज, लिंगमपर्ति,
एलेश्वरम मंडल,
काकीनाडा जिला, आंध्र प्रदेश, भारत।
तेलंगाना
नाडीपति गोशाला
नाडीपति विलेज, येंकथला के पास,
मोमिनपेट मंडल,
विकाराबाद जिला, तेलंगाना, भारत।
3. नाडीपति गोशाला की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
आंध्र प्रदेश गोशाला की स्थापना 2007 में हुई।
तेलंगाना गोशाला की स्थापना 2025 में हुई।
4. आपने शुरुआत कितनी गायों से की थी?
उत्तर: मेरी यात्रा वर्ष 2005 में काकीनाडा में केवल एक गाय से शुरू हुई थी।
5. वर्तमान में आपके पास कुल कितनी गायें हैं?
उत्तर: वर्तमान में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की दोनों गोशालाओं को मिलाकर हमारे पास 10,600 से अधिक गायें हैं।
6. पाँच फीट ऊँची गाय को दो फीट से कम ऊँचाई तक लाने में कितना समय लगा?
उत्तर: इस संपूर्ण शोध यात्रा में 18 वर्ष लगे।
विकास की समय-सीमा:
5 फीट से 3 फीट से कम – 6 वर्ष (मिनिएचर पुंगनूर)
3 फीट से 2 फीट तक – 4 वर्ष (मिनिएचर)
2 फीट से कम – 4 वर्ष (माइक्रो मिनिएचर)
लगभग 1 फीट ऊँचाई तक – 3 वर्ष (नाडीपति नैनो)
आज इन गायों को तीन विशेष श्रेणियों में विकसित किया गया है:
मिनिएचर
माइक्रो मिनिएचर
नाडीपति नैनो
7. वर्तमान में आपकी गोशालाएँ कितने राज्यों में हैं?
उत्तर: वर्तमान में हमारी गोशालाएँ केवल दो राज्यों में हैं—
आंध्र प्रदेश
तेलंगाना
8. बड़ी गायों को छोटे आकार में विकसित करने का विचार आपको कैसे आया?
उत्तर: भारतीय सनातन संस्कृति में पहले लगभग हर घर में एक गाय होती थी। समय के साथ बड़े घर छोटे हो गए और अपार्टमेंट संस्कृति बढ़ने लगी। इसके कारण लोगों के लिए पारंपरिक आकार की गाय पालना कठिन हो गया।
जिस प्रकार आधुनिक जीवनशैली के अनुसार बोन्साई पौधे, एक्वेरियम की मछलियाँ और छोटी नस्ल के पालतू कुत्ते विकसित किए गए, उसी प्रकार मेरा सपना था कि हर परिवार आसानी से भारतीय देशी गाय पाल सके।
नाडीपति एक्यूपंक्चर (ट्रीटमेंट) पद्धति तथा लगभग 10 पीढ़ियों तक प्राकृतिक चयन आधारित अनुसंधान के माध्यम से हमने लगभग 5 फीट ऊँची गाय को लगभग 1 फीट ऊँचाई तक विकसित किया, जबकि उसकी देशी रक्तवंशीय विशेषताओं को सुरक्षित रखा।
9. अब तक आपने कितने लोगों को गायें उपलब्ध कराई हैं?
उत्तर: अब तक हमने 1 लाख (100,000) से अधिक लोगों को गायें उपलब्ध कराई हैं।
हमारे प्रयासों के कारण आज केवल गाँवों में ही नहीं, बल्कि शहरों और अपार्टमेंटों में भी लोग गाय पाल रहे हैं।
वर्ष 2013 में मैंने काउ हग थेरेपी (Cow Hug Therapy) की अवधारणा की शुरुआत की। आज दुनिया के अनेक देश गायों के साथ समय बिताने के महत्व को पहचान रहे हैं।
10. आपकी गायें किन-किन प्रमुख व्यक्तियों को दी गई हैं?
उत्तर: हमारी गायें अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों तक पहुँची हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी – 6 गायें और 1 बैल
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी – 1 गाय और 1 बैल
संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प – 2 गायें और 1 बैल
प्रख्यात उद्योगपति श्री अनंत अंबानी
इसके अलावा अनेक मुख्यमंत्री, मंत्री, संत-महात्मा, उद्योगपति तथा फिल्म जगत की प्रमुख हस्तियाँ।
11. आपका भविष्य का लक्ष्य क्या है?
उत्तर: मेरा सपना है कि हर घर में एक गाय हो।
हमारा लक्ष्य है कि प्राकृतिक रूप से विकसित लगभग 2 फीट ऊँचाई वाली, प्रतिदिन लगभग 2 लीटर दूध देने वाली एक गाय और एक बैल केवल ₹10,000 की किफायती कीमत पर उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि प्रत्येक भारतीय परिवार में पुनः गौ माता का स्थान स्थापित हो सके।
12. क्या आपको सरकार से किसी प्रकार की सहायता चाहिए?
उत्तर: मुझे सरकार से व्यक्तिगत रूप से किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता नहीं है।
मेरी केवल एक विनम्र प्रार्थना है—
"गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए।"
जय गौ माता! 🐄🙏


